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आरी गगन माँ ज्योत जलंत है - गगन माँ राम रमे रंगारो रे

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आरी गगन माँ ज्योत जलंत है

ऐनु अखंड भयो उजवालो, 
रे गगन माँ

आरी गगन माँ ज्योत जलंत है

ऐनु अखंड भयो उजवालो, 
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

म्हारो परभु रमे छे निराधारो 
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

आरी गगन माँ रे 
बाजा बाजे हरी

ऐनु झीनू झीनू आ झनकारो
रे गगन माँ

आरी गगन माँ रे 
बाजा बाजे हरी

ऐनु झीनू झीनू आ झनकारो
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

म्हारो परभु रमे छे निराधारो 
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

गुरुमुख ज्ञानी सतगुरु आगे

तियाँ मटी जाए जम का फेरा
रे गगन माँ

गुरुमुख ज्ञानी सतगुरु आगे

तियाँ मटी जाए जम का फेरा
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

म्हारो परभु रमे छे निराधारो 
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

कहत कबीरा सुनो मेरे साधो

ऐवा अनगढ़िया तीरथ कोने भारिया
रे गगन माँ

भणत कबीरा सुनो भाई साधो

ऐवा अनगढ़िया तीरथ कोने भारिया
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

म्हारो परभु रमे छे निराधारो 
रे गगन माँ

गगन माँ रे
राम रमे रंगारो रे हरी

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