किसी की याद में ऐ दिल, तुझे दीवानगी छाई,
अब तो तेरी सर-ए-बाज़ार में होती है रुसवाई।
लड़ाई किसने की, और देखिए सज़ा किसने पाई,
लड़ी आँखों से आँखें, फिर तबीयत दिल पे क्यों आई।
न इतलाक़े चलो इतना, कहीं ठोकर न खा बैठो,
जवानी आपकी, फिर ऐ जोबन पे इतराई।
मुझे ज़िंदा किया उसने, करिश्मा यह नया देखा,
मेरी क़ुर्बत को कम कहते हुए ठोकर से ठुकराई।
शराब-ए-वस्ल ले आता है वह सत्तार घर मेरे,
चलो मस्तों, उठो दौड़ो, मुक़द्दर आज बन आई।