ए चांद उनको पहेला मेरा सलाम केहना
जिर मुजपे जो बीती है बातें तमाम केहना
बेदर्द जमाने ने बेहद सताया फिर भी
कुछ भी न की शिकायत इतना कलाम केहना
गुलशन ,वो यहां आ के मेरा पता जो पूछे,
उसने उठा लिया है अपना मकाम केहना
छोडा है दम वफा में , देना गवाही जर्रों,
था सुबह शाम लब पर तेरा ही नाम केहना
जाते हो वतन ‘नाझिर‘,गर यार मिले मेरा
मैं खुश हुं ,दुआ करना, इतना पयाम देना